TAT TVAM ASI




 


तत् त्वम् असि

हर से हर जड़ा है, हर में हर घुला है
हर से हर विकार, तो देख हर कितना हरा है 


दिल से दिल जुड़े है, दिल में दिल मिले है
दिलों में हो दुआ तो, दिल सारे खिलें है 


ये तेरा साया है, ये मेरा साया है,
जब सायों ने हाथ है पकड़ें,  तो हम तुम क्यूँ जुदा है


परछाइयों को देखो, तो हम तुम कहाँ भिन्न है
एक सा सांवला रंग, एक ही निराकार काया, क्या यह इश्वर का बदन है? 

* With tribute to: हर में हर को देखा


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