PANKHUDIA




लाल पंखुड़ियां 

श्रद्धा से, श्रम की लाल पंखुड़ियां
माँ तुलसी के चरणो में सादर अर्पण 


घर के किसी कोने में छुपी, समय में गुमी
पर शक्ति रूपेण, माँ-सी संरक्षक ये पंखुड़ियां 


कहीं से भीनी सुगंध मिलती (आती), साँसों में घुलती
बीने दिखे, तेरा मीठा आभास कराती, याद दिलाती पंखुड़ियां 


मुरझा जाती मिटटी होती, पल भर में ये उखड़ियाँ?
{मुरझा जायेंगे श्रद्धा सुमन भी, हाय कुछ ही पल में}
पुरुषार्थ में पर सदा खिली (खिलती) रहती, हंसती लाल पंखुड़ियां

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